बिना बिचौलिये का पैसा
बिटकॉइन 2009 में सातोशी नाकामोतो नाम से जाने जाने वाले किसी अज्ञात व्यक्ति या समूह ने शुरू किया था। इससे दो लोग इंटरनेट के ज़रिये बिना बैंक के एक-दूसरे को मूल्य भेज सकते हैं। किसी कंपनी के बजाय दुनिया भर के हज़ारों कंप्यूटर बहीखाते की एक ही प्रति रखते हैं, जिसे ब्लॉकचेन कहते हैं।
लेन-देन की पुष्टि कैसे होती है
नए लेन-देन लगभग हर दस मिनट में ब्लॉक में जोड़े जाते हैं। माइनर एक कठिन गणितीय पहेली हल करके अगला ब्लॉक जोड़ने की होड़ करते हैं—इसे प्रूफ ऑफ वर्क कहते हैं। जीतने वाले को नए बने बिटकॉइन और शुल्क मिलते हैं। किसी ब्लॉक के ऊपर और ब्लॉक जुड़ जाने के बाद उसे बदलना लगभग असंभव हो जाता है।
तय आपूर्ति और हॉल्विंग
2.1 करोड़ से ज़्यादा बिटकॉइन कभी नहीं होंगे। लगभग हर चार साल में माइनरों का इनाम आधा हो जाता है—इसे हॉल्विंग कहते हैं। इससे नए कॉइन बनने की रफ्तार धीमी होती है; अगली हॉल्विंग आप हमारे बिटकॉइन हॉल्विंग काउंटडाउन पर देख सकते हैं।
कीमत इतनी क्यों बदलती है
बिटकॉइन की कीमत केवल एक्सचेंजों पर मांग और आपूर्ति से, चौबीसों घंटे तय होती है। खबरें, ब्याज दरें, नियम और निवेशकों का मूड कुछ ही दिनों में इसे दसियों प्रतिशत ऊपर-नीचे कर सकते हैं। फियर एंड ग्रीड इंडेक्स और बिटकॉइन रेनबो चार्ट मौजूदा कीमत को संदर्भ में देखने में मदद करते हैं, और बिटकॉइन प्राइस पेज लाइव डेटा व विश्लेषण दिखाता है।
ध्यान रखने वाले जोखिम
- कीमतें तेज़ी से गिर सकती हैं; केवल उतना ही निवेश करें जितना खोना आप सह सकें।
- लेन-देन वापस नहीं होता: गलत पते पर भेजे गए कॉइन खो जाते हैं।
- जिसके पास प्राइवेट की है, कॉइन उसी के नियंत्रण में हैं, इसलिए सुरक्षित भंडारण ज़रूरी है।
- नियम और टैक्स हर देश में अलग होते हैं।